
- जेडीए जोन-2 में आमेर में ठाठर आवासीय योजना के पास 40 बीघा में प्राइम सिटी और 10 बीघा कृषि भूमि पर मोहम्मद नगर के नाम
से काटी जा रही है अवैध कॉलोनी
- प्राइम सिटी के पजेशन लेटर रेरा से रजिस्टर्ड होने का झांसा देकर बेचे जा रहे हैं
- 1027 भूखण्ड है प्राइम सिटी में और मोहम्मद नगर में 220 भूखण्ड सृजित
- बहुचर्चित गुलाब कोठारी प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को धज्जियां उड़ाकर काट रहे हैं अवैध कॉलोनी
प्राइम सिटी में रेरा के नाम से बेच रहे हैं भूखण्ड

ईको सेेंसेटिव जोन में नाहरगढ़ सेंचुरी से सटी पहाड़ी के नीचे चालीस बीघा जमीन पर प्राइम सिटी के नाम से अवैध कॉलोनी शर्मा कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स बसा रहा है। इस कंपनी से जुड़े बद्री विशाल शर्मा, सुनील अग्रवाल व अन्य भागीदार लोगों को गुमराह करके भूखण्ड बेचने में लगे हुए हैं। ये लोग प्राइम सिटी के नाम से पजेशन लेटर दे रहे हैं, जिसमें रेरा की तर्ज पर नम्बर की मोहर लगाते हैं। भू-माफिया यह कहकर लोगों को भूखण्ड बेच रहे हैं कि यह स्कीम रेरा से पंजीकृत है और जेडीए से भी अप्रूव्ड हो चुकी है। जेडीए कार्यवाही नहीं करेगा। जबकि हकीकत यह है कि यह स्कीम पूर्णतया अवैध है। रेरा और जेडीए से मंजूरी नहीं है। बल्कि कृषि भूमि ईको सेंसेटिव जोन में है। इस वजह से रेरा और जेडीए भी आवासीय कॉलोनी बसाने की अनुमति नहीं दे सकता है। यहां पर सिर्फ खेतीबाड़ी ही हो सकती है। बावजूद इसके भू-माफिया और कंपनी के दलाल लोगों को गुमराह करके भूखंड बेचने में लगे हुए हैं। प्राइम सिटी से लगती दस बीघा जमीन पर काटी जा रही अवैध कॉलोनी मोहम्मद नगर में भी धडल्ले से भूखण्ड बेचे जा रहे हैं। यहां भी सवा दो सौ भूखण्ड है, जो बैकडेट में सोसायटी पट्टे के नाम से बेचे जा रहे हैं।
1027 भूखण्ड है प्राइम सिटी में
प्राइम सिटी में 1027 भूखण्ड है। इसमें से 984 भूखण्ड तो आवासीय है और 43 भूखण्ड कॉमर्शियल हैं। मुख्य सडक़ चालीस फीट है और अंदर की पच्चीस फीट है। चालीस फीट पर 20 हजार प्रतिवर्गगज के हिसाब से भूखण्ड बेचे जा रहे हैं तो पच्चीस फीट पर 25 हजार के भाव हैं। कॉमर्शियल भूखण्ड 30 हजार रुपये प्रतिगज के हिसाब से बेच रहे हैं। इसी तरह मोहम्मद नगर में भी 220 भूखण्ड हैं। वहां भी दस से पन्द्रह हजार रुपये के भाव से भूखण्ड बेचे जा रहे हैं। मोहम्मद नगर तो पूरी तरह से पहाड़ी की तलहटी के नीचे नाहरगढ़ सेंचुरी की जमीन से सटा हुआ है। दोनों ही कॉलोनियों में चारदीवारी बनाने का काम चल रहा है। कुछ ने तो घर भी बना लिए , लेकिन बिजली के कनेक्शन नहीं होने से कोई रहता नहीं है।
ईको सेंसेटिव जोन में सुप्रीम कोर्ट के हैं सख्त आदेश
ईको सेंसेटिव जोन में शामिल जमीनों में किसी भी तरह की आवासीय, कॉमर्शियल और अन्य गतिविधियों पर पूर्णतया रोक है। सुप्रीम कोर्ट ने जमवारामगढ़ सेंचुरी, नाहरगढ़ सेंचुरी के कई गांवों में जमीनों के बेचान और रजिस्ट्री पर रोक लगा रखी है। नाहरगढ़ व जमवारामगढ़ सेंचुरी और उससे जुड़ी पहाडिय़ां अरावली पर्वतमाला में आती है। सेंचुरी से जुड़ी बहुत सी कॉलोनियों के मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के जयपुर मास्टर प्लान और ईको सेंसेटिव जोन में आवासीय कॉलोनी बसाने पर रोक के आदेश के बावजूद कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स अवैध कॉलोनी बसाने में लगे हुए हैं। जेडीए, वन विभाग और तहसील कार्यालय आमेर भी लिखित शिकायतों के बावजूद भू-माफियाओं को संरक्षण देने में लगे हुए हैं।
जेडीए कर रही है हाईकोर्ट आदेश की अवहेलना
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर पीठ ने डी.बी.सिविल रिट याचिका (पीआईएल-1554/2004) गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार एवं अन्य प्रकरण में 12 जनवरी, 2017 को सुनाए आदेश में मास्टर प्लान के विपरीत किसी भी तरह के आवासीय, कॉमर्शियल व संस्थानिक कार्यों को प्रतिबंधित कर दिया था। कोर्ट ने 35 तरह के दिशा-निर्देश जारी कर रखे हैं, जिसमें हरित क्षेत्र (ईकोलॉजिकल व ग्रीन जोन) में किसी भी तरह की गतिविधियों व विकास कार्यों पर भी रोक लगा रखी है। दिल्ली रोड, आगरा रोड के हरित क्षेत्र को देखते हुए इसे मास्टर प्लान में ईकोलॉजिकल जोन में रखा हुआ है। हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान की सख्ती से पालन के आदेश दिए हैं। जेडीए ने वर्ष 2011 में दिल्ली रोड व आगरा रोड पर दर्शित ईकोलोजिकल जोन व ग्रीन एरिया को 2025 के मास्टर प्लान में बदल दिया था, जिसे भी हाईकोर्ट ने गलत बताते हुए इसे पुन:रि-स्टोर करने के आदेश दिए हैं। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि ग्रीन एरिया व ईकोलॉजिकल जोन में मास्टर प्लान में अनुमति योग्य विकास कार्य ही करवाए जा सकेंगे। इन आदेश के बाद जेडीए ने तो अपनी गतिविधियों पर पूर्णतया रोक लगा दी, लेकिन भू-माफियाओं पर बंदिश नहीं होने से वे ईकोलॉजिकल जोन में अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं। आमेर का ठाठर गांव और आस-पास का ईलाका ईको-सेंसेटिव जोन में है। ईकोलॉजिकल जोन की कृषि भूमियों पर किसी भी तरह आवासीय व कॉमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे किसी भी निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दे रखे हैं।
राजस्थान न्यूज़