- सरकारी निर्देशों के बावजूद नहीं रुका प्रदूषण, औद्योगिक क्षेत्रों और सीवरेज का गंदा पानी अब भी पहुंच रहा नदी में, संयुक्त सर्वे में बड़ा खुलासा

जयपुर। राजधानी जयपुर की महत्वाकांक्षी 1500 करोड़ रुपए की द्रव्यवती रिवर परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य सरकार के सख्त निर्देशों और संयुक्त निरीक्षण के बावजूद द्रव्यवती नदी में आज भी औद्योगिक क्षेत्रों और सीवरेज लाइनों से लगातार गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी संभाल रहे विभाग ही अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ते नजर आ रहे हैं।
सरकार ने द्रव्यवती को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB), जेडीए और नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाई थी। समिति ने बंबाला पुलिया से स्वर्ण जयंती पार्क तक करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र का विस्तृत सर्वे किया, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी चिंताजनक बनी हुई है।
सर्वे में खुली पोल, 30 स्थानों से नदी में गिर रहा गंदा पानी
संयुक्त टीम के सर्वे में सामने आया कि द्रव्यवती नदी में लगभग 30 स्थानों से सीधे गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। इनमें से 15 स्थान ऐसे हैं, जहां प्रदूषण रोकने की सीधी जिम्मेदारी राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की थी, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
स्थिति यह है कि सांगानेर, सीतापुरा, विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र और सुदर्शनपुरा जैसे औद्योगिक इलाकों से निकलने वाला दूषित पानी लगातार द्रव्यवती में पहुंच रहा है। इससे करोड़ों रुपए खर्च कर विकसित की गई नदी परियोजना अपनी मूल पहचान हासिल नहीं कर पा रही और आज भी लोगों के बीच "गंदे नाले" की छवि से बाहर नहीं निकल सकी है।
रंगाई-छपाई इकाइयां बनीं बड़ी चुनौती

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सांगानेर क्षेत्र की कई रंगाई-छपाई इकाइयां अपना रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदी में छोड़ रही हैं। सरकार ने इन इकाइयों को तत्काल कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) से जोड़ने और अनट्रीटेड पानी को नदी में जाने से रोकने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई स्थानों पर अभी भी नियमों का पालन नहीं हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक अपशिष्ट का लगातार नदी में प्रवाह पर्यावरण के साथ-साथ भूजल और जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
सीवरेज लाइनें भी बन रहीं प्रदूषण का कारण
सर्वे में यह भी पाया गया कि कई स्थानों पर सीवरेज लाइनें बरसाती नालों से जुड़कर सीधे द्रव्यवती नदी में गिर रही हैं। सुशीलपुरा पुलिया क्षेत्र में स्थिति सबसे गंभीर पाई गई, जहां भारी मात्रा में सीवरेज नदी में पहुंच रहा था।
इस समस्या के समाधान के लिए जेडीए ने लगभग 15 करोड़ रुपए की लागत से नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया है, लेकिन परियोजना अभी पूरी नहीं हो सकी है।
जिम्मेदार विभागों की धीमी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, जेडीए और नगर निगम को भी 15 स्थानों पर गंदे पानी के प्रवाह को रोकने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, अब तक केवल 10 स्थानों पर ही सुधारात्मक कार्य हो पाए हैं। पांच स्थानों पर अभी भी गंदा पानी द्रव्यवती नदी में गिर रहा है।
यानी एक ओर सरकार स्वच्छ द्रव्यवती का सपना दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार एजेंसियों की सुस्ती और समन्वय की कमी के कारण करोड़ों रुपए की परियोजना का उद्देश्य अधूरा दिखाई दे रहा है।
अधिकारियों के पास नहीं जवाब
इस पूरे मामले में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी (आरओ साउथ) विवेक गोयल से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका। वहीं मंडल के मुख्य पर्यावरणविद् प्रेमा लाल ने कहा कि द्रव्यवती को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं, हालांकि उनके हिस्से के कार्यों की प्रगति की उन्हें तत्काल जानकारी नहीं थी।
बड़ा सवाल: आखिर कब साफ होगी द्रव्यवती?
द्रव्यवती रिवर फ्रंट को जयपुर की पहचान और शहरी सौंदर्यीकरण की बड़ी परियोजना माना गया था। लेकिन सरकारी निर्देशों, संयुक्त समितियों और करोड़ों रुपए के खर्च के बावजूद यदि नदी में आज भी सीवरेज और औद्योगिक अपशिष्ट गिर रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि जिम्मेदारी तय कब होगी?
अब निगाहें राज्य सरकार और संबंधित विभागों पर हैं कि वे केवल बैठकों और निरीक्षणों तक सीमित रहते हैं या वास्तव में द्रव्यवती को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सख्त कार्रवाई भी करते हैं।
राजस्थान न्यूज़