- प्रतापगढ़ के देवगढ़ में सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा, लूटे गए जेवर बेचकर भरी ट्रैक्टर की किस्त

प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ जिले के देवगढ़ थाना क्षेत्र में हुए मां-बेटी के सनसनीखेज डबल मर्डर और लूटकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। जिस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी, उसके पीछे कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि मृतका के अपने ही रिश्तेदार निकले। ट्रैक्टर की किश्त भरने और आर्थिक तंगी से निकलने के लिए देवर और उसकी पत्नी ने ऐसी खूनी साजिश रची कि एक ही रात में परिवार की खुशियां उजड़ गईं।
पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देशन में गठित विशेष टीमों ने 13 दिन तक लगातार जांच, तकनीकी विश्लेषण और साइबर ट्रैकिंग के बाद इस ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा करते हुए आरोपी बाबूलाल मीणा और उसकी पत्नी गेंदाबाई को गिरफ्तार कर लिया।
शादी से लौटी बेटी, सामने था मौत का मंजर
घटना 29 मई 2026 की है। देवगढ़ थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के पुरुष सदस्य मजदूरी के लिए राजसमंद गए हुए थे। घर में केवल मानकी बाई (40) और उनकी दो बेटियां मौजूद थीं।
28 मई की रात बड़ी बेटी लाली मीणा पड़ोसी गांव में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने गई थी। अगले दिन सुबह जब वह घर लौटी तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। आंगन में एक ही खाट पर उसकी मां और छोटी बहन कला उर्फ कमला खून से लथपथ पड़ी थीं।
हमलावरों ने दोनों पर कुल्हाड़ी और धारदार हथियार से बेरहमी से वार किए थे। कला की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि गंभीर रूप से घायल मानकी बाई जिंदगी और मौत से जूझ रही थी। घर के ताले टूटे हुए थे और सामान बिखरा पड़ा था, जिससे मामला लूट और हत्या का प्रतीत हो रहा था।
सीतामाता के जंगलों तक पहुंची जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य स्वयं मौके पर पहुंचे। एफएसएल, डॉग स्क्वॉड, एमओबी और साइबर टीम को जांच में लगाया गया। सीतामाता अभयारण्य के दुर्गम और डार्क जोन क्षेत्र में सुराग जुटाना आसान नहीं था। पुलिस ने राजस्थान और गुजरात के कई इलाकों में जांच का दायरा बढ़ाया। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल की गई। आखिरकार 11 जून को सूचना मिली कि मुख्य आरोपी सीतामाता के घने जंगलों में छिपा हुआ है। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में पहले वह पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के सामने टिक नहीं सका और उसने पूरी साजिश कबूल कर ली।
ट्रैक्टर बचाने के लिए बहाया रिश्तों का खून
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बाबूलाल ने कुछ महीने पहले अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर 2.55 लाख रुपये में सेकंड हैंड ट्रैक्टर खरीदा था। उसने 50 हजार रुपये जमा कर दिए थे, लेकिन बाकी राशि के फाइनेंस और किश्तों की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि उसे ट्रैक्टर हाथ से निकलने का डर सताने लगा। उसने रिश्तेदारों और परिचितों से मदद मांगी, लेकिन कहीं से पैसे नहीं मिले। इसी दौरान उसकी नजर अपनी भाभी मानकी बाई के जेवरों पर पड़ी। उसे पता था कि घर में सोने-चांदी के आभूषण और नकदी रखी हुई है। यहीं से एक खौफनाक साजिश ने जन्म लिया।
आधी रात को पहुंचा मौत बनकर
28 मई की रात बाबूलाल और उसकी पत्नी गेंदाबाई कुल्हाड़ी और छुरी लेकर मानकी बाई के घर पहुंचे। दोनों मां-बेटी गहरी नींद में एक ही खाट पर सो रही थीं। आरोपियों ने पहले छोटी बेटी कला पर हमला किया और फिर मानकी बाई को निशाना बनाया। ताबड़तोड़ वारों से दोनों को मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने घायल महिला के हाथों से चांदी के कड़े जबरन निकाल लिए और घर में रखी नकदी भी लूट ली। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों अपने घर लौट गए और अगले दिन ग्रामीणों के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर शोक जताने का नाटक करते रहे ताकि किसी को उन पर शक न हो।
जेवर बेचकर जमा की ट्रैक्टर की किश्त
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि हत्या के बाद लूटे गए चांदी के कड़े एक सुनार को बेच दिए गए थे। उन पैसों का उपयोग ट्रैक्टर की किश्त और फाइनेंस संबंधी भुगतान में किया गया। यही आर्थिक लेनदेन पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग साबित हुआ और इसी कड़ी ने आखिरकार आरोपियों तक पहुंचा दिया।
पुलिस टीम की अहम भूमिका
इस ब्लाइंड डबल मर्डर केस को सुलझाने में देवगढ़ थाना पुलिस, साइबर सेल और जिला विशेष टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एसएचओ नगजीराम, एएसआई मनोहरलाल, कांस्टेबल गोम सिंह, चालक नंदूराज सिंह और साइबर सेल के कांस्टेबल रमेशचंद्र मीणा ने तकनीकी साक्ष्य जुटाने और आरोपियों तक पहुंचने में अहम योगदान दिया। फिलहाल पुलिस हत्या में प्रयुक्त हथियारों और शेष लूटे गए आभूषणों की बरामदगी के लिए दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है।
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