- पद नहीं, जिम्मेदारी चाहिए: अशोक गहलोत ने हाईकमान को दिया खुला संदेश

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चाएं जारी हैं। क्या गहलोत सक्रिय रूप से राजस्थान की राजनीति में बने रहेंगे या फिर कांग्रेस संगठन में कोई बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी संभालेंगे? इस सवाल पर गहलोत ने एक बार फिर अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि वह चाहे कहीं भी रहें, उनकी प्राथमिकता राजस्थान की जनता की सेवा ही रहेगी।
गहलोत ने कहा, "मैं पहले भी कह चुका हूं और आज फिर दोहराता हूं—'मैं थांसू दूर नहीं'। मैं चाहे दिल्ली जाऊं, लंदन जाऊं, जयपुर रहूं, जोधपुर या जालौर में रहूं, राजस्थान की जनता से कभी दूर नहीं हो सकता।"
हाईकमान जो जिम्मेदारी देगा, वही स्वीकार करूंगा
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए कि वह किसी पद की मांग करने वालों में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार ने उन्हें राजनीतिक जीवन में अपेक्षा से अधिक सम्मान और अवसर दिए हैं। ऐसे में अब उनका दायित्व बनता है कि वह किसी पद की इच्छा न रखें और पार्टी नेतृत्व के फैसले का सम्मान करें। गहलोत ने कहा कि यदि पार्टी उन्हें राजस्थान में कोई जिम्मेदारी देती है तो वह उसे निभाएंगे, और यदि दिल्ली में संगठन या पार्टी के किसी राष्ट्रीय पद पर काम करने को कहा जाता है तो उसे भी पूरी निष्ठा से स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं अपने लिए किसी पद की मांग नहीं करूंगा। हाईकमान जो भी फैसला करेगा, वह मुझे मंजूर होगा।"
कांग्रेस नेतृत्व पर जताया भरोसा
अशोक गहलोत ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान की जनता और कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें भरपूर अवसर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें पांच बार सांसद और छह बार विधायक चुना, जबकि कांग्रेस नेतृत्व ने तीन बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया। गहलोत ने विशेष रूप से कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके विश्वास के कारण ही उन्हें लगातार काम करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं, जहां किसी मुख्यमंत्री को लगातार पूरे पांच-पांच साल तक काम करने का अवसर मिला हो।
राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका को लेकर बढ़ी अटकलें
गहलोत के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में कांग्रेस संगठन में बदलाव और आगामी चुनावी रणनीतियों को लेकर चर्चाओं के बीच यह माना जा रहा है कि पार्टी अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारियां सौंप सकती है। हालांकि गहलोत ने अपने बयान में किसी पद की इच्छा से साफ इनकार करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी प्राथमिकता पद नहीं बल्कि संगठन और जनता की सेवा है।
राहुल गांधी के एजेंडे को बताया भविष्य की राजनीति का आधार
गहलोत ने कहा कि वर्तमान समय में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने राहुल गांधी के उस आह्वान का उल्लेख किया जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं से दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के साथ खड़े रहने को कहा गया है।
उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी अन्याय या अत्याचार हो, वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सबसे पहले पहुंचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर जनआंदोलन खड़ा करना चाहिए। गहलोत के अनुसार यही कांग्रेस की मूल विचारधारा है और भविष्य की राजनीति का आधार भी।
राजस्थान में सक्रिय रहेंगे गहलोत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत के बयान से यह स्पष्ट संदेश गया है कि वह सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के मूड में नहीं हैं। चाहे उनकी भूमिका राजस्थान तक सीमित रहे या राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित हो, वह कांग्रेस संगठन और जनसरोकारों के मुद्दों पर सक्रिय बने रहेंगे। फिलहाल गहलोत ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि उनकी राजनीति पद प्राप्ति की नहीं, बल्कि पार्टी और जनता के प्रति जिम्मेदारी निभाने की राजनीति है। अब निगाहें कांग्रेस हाईकमान के अगले फैसले पर टिकी हैं कि राजस्थान के इस अनुभवी नेता को भविष्य में कौन सी नई जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
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